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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 16.11

या ते॑ हे॒तिर्मी॑ढुष्टम॒ हस्ते॑ ब॒भूव॑ ते॒ धनु॑ः । तया॒ऽस्मान्वि॒श्वत॒स्त्वम॑य॒क्ष्मया॒ परि॑ भुज ॥११॥

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