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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 15.56

अ॒यं ते॒ योनि॑रृ॒त्वियो॒ यतो॑ जा॒तो अरो॑चथा । तं जा॒नन्न॑ग्न आ रो॒हाथा॑ नो वर्धया र॒यिम् ॥५६॥

पूरा अध्याय