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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 15.44

अग्ने॒ तम॒द्याश्वं॒ न स्तोमै॒ः क्रतुं॒ न भ॒द्रᳪ हृ॑दि॒स्पृश॑म् । ऋ॒ध्यामा॑ त॒ ओहै॑ः ॥४४॥

पूरा अध्याय