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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 15.37

क्ष॒पो रा॑जन्नु॒त त्मनाग्ने॒ वस्तो॑रु॒तोषस॑ः । स ति॑ग्मजम्भ र॒क्षसो॑ दह॒ प्रति॑ ॥३७॥

पूरा अध्याय