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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 14.3

स्वैर्दक्षै॒र्दक्ष॑पिते॒ह सी॑द दे॒वाना॑ᳪ सु॒म्ने बृ॑ह॒ते रणा॑य ।
पि॒तेवै॑धि सू॒नव॒ आ सु॒शेवा॑ स्वावे॒शा त॒न्वा सं वि॑शस्वा॒श्विना॑ऽध्व॒र्यू सा॑दयतामि॒ह त्वा॑ ॥३॥

पूरा अध्याय