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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 13.16

ध्रु॒वाऽसि॑ ध॒रुणाऽऽस्तृ॑ता वि॒श्वक॑र्मणा ।
मा त्वा॑ समु॒द्र उद्व॑धी॒न्मा सु॑प॒र्णोऽव्य॑थमाना पृथि॒वीं दृ॑ᳪह ॥१६॥

पूरा अध्याय