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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 12.66

नि॒वेश॑नः स॒ङ्गम॑नो॒ वसू॑नां॒ विश्वा॑ रू॒पाऽभि च॑ष्टे॒ शची॑भिः ।
दे॒व इ॑व सवि॒ता स॒त्यध॒र्मेन्द्रो॒ न त॑स्थौ सम॒रे प॑थी॒नाम् ॥६६॥

पूरा अध्याय