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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 12.45

अपे॑त॒ वी॒त॒ वि च॑ सर्प॒तातो॒ येऽत्र॒ स्थ पु॑रा॒णा ये च॒ नूत॑नाः ।
अदा॑द्य॒मो॒ऽव॒सानं॑ पृथि॒व्या अक्र॑न्नि॒मं पि॒तरो॑ लो॒कम॑स्मै ॥४५॥

पूरा अध्याय