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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 12.115

आ ते॑ व॒त्सो मनो॑ यमत्पर॒माच्चि॑त्स॒धस्था॑त् । अग्ने॒ त्वाङ्का॑मया गि॒रा ॥११५॥

पूरा अध्याय