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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 11.52

तस्मा॒ अरं॑ गमाम वो॒ यस्य॒ क्षया॑य॒ जिन्व॑थ । आपो॑ ज॒नय॑था च नः ॥५२॥

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