शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 11.45
शि॒वो भ॑व प्र॒जाभ्यो॒ मानु॑षीभ्य॒स्त्वम॑ङ्गिरः ।
मा द्यावा॑पृथि॒वी अ॒भि शो॑ची॒र्माऽन्तरि॑क्षं॒ मा वन॒स्पती॑न् ॥४५॥
शि॒वो भ॑व प्र॒जाभ्यो॒ मानु॑षीभ्य॒स्त्वम॑ङ्गिरः ।
मा द्यावा॑पृथि॒वी अ॒भि शो॑ची॒र्माऽन्तरि॑क्षं॒ मा वन॒स्पती॑न् ॥४५॥