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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 11.24

आ वि॒श्वत॑ः प्र॒त्यञ्चं॑ जिघर्म्यर॒क्षसा॒ मन॑सा॒ तज्जु॑षेत ।
मर्य॑श्री स्पृह॒यद्व॑र्णो अ॒ग्निर्नाभि॒मृशे॑ त॒न्वा जर्भु॑राणः ॥२४॥

पूरा अध्याय