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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 11.10

अभ्रि॑रसि॒ नार्य॑सि॒ त्वया॑ व॒यम॒ग्निᳪ श॑केम॒ खनि॑तुᳪ स॒धस्थ॒ आ । जाग॑तेन॒ छन्द॑साऽङ्गिर॒स्वत् ॥१०॥

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