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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 10.5

सोम॑स्य॒ त्विषि॑रसि॒ तवे॑व मे॒ त्विषि॑र्भूयात् । अ॒ग्नये॒ स्वाहा॒ सोमा॑य॒ स्वाहा॑ सवि॒त्रे स्वाहा॒ सर॑स्वत्यै॒ स्वाहा॑
पू॒ष्णे स्वाहा॒ बृह॒स्पत॑ये॒ स्वाहेन्द्रा॑य॒ स्वाहा॒ घोषा॑य॒ स्वाहा॒ श्लोका॑य॒ स्वाहा
ऽᳪशा॑य॒ स्वाहा॒ भगा॑य॒ स्वाहा॑ ऽर्य॒म्णे स्वाहा॑ ॥५॥

पूरा अध्याय