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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 10.14

ऊ॒र्ध्वामा रो॑ह प॒ङ्क्तिस्त्वा॑ऽवतु शाक्वररैव॒ते साम॑नी त्रिणवत्रयस्त्रि॒ᳪशौ॒ स्तोमौ॑ हेमन्तशिशि॒रावृ॒तू वर्चो॒ द्रवि॑णं॒
प्रत्य॑स्तं॒ नमु॑चे॒ः शिर॑ः ॥१४॥

पूरा अध्याय