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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 9.4

को॑ऽसि कत॒मो॑ऽसि॒ कस्या॑सि॒ को नामा॑सि ।
यस्य॑ ते॒ नामामन्म॑हि॒ यं त्वा॒ सोमे॒नाती॑तृपाम ॥४॥

पूरा अध्याय