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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 8.10

अग्ने॒ वाक्पत्नि॑ सजूर्दे॒वेन॒ त्वष्ट्रा॑ ।सोमं॑ पिब॒ स्वाहा॑ ॥३॥

पूरा अध्याय