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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 6.86

अ॒मूर्या उप॒ सूर्ये॒ याभि॑र्वा॒ सूर्यः॑ स॒ह । ता नो॑ हिन्वन्त्वध्व॒रम् ॥३॥

पूरा अध्याय