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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 6.5

विष्णोः॒ कर्मा॑णि पश्यत॒ यतो॑ व्र॒तानि॑ पस्प॒शे । इन्द्र॑स्य॒ युज्यः॒ सखा॑ ॥५॥

पूरा अध्याय