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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 6.40

तं दे॒वेभ्यो॑ देव॒त्रा दा॑त शुक्र॒पेभ्यः॑ । येषां॑ भा॒ग स्थ स्वाहा॑ ॥५॥

पूरा अध्याय