ग्रंथशुक्ल यजुर्वेद (काण्व)अध्याय 66.32शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 6.32३१॥ इ॒दमा॑पः॒ प्रव॑हत॒ यत्किं च॑ दुरि॒तं मयि॑। यद्वा॒हम॑भिदु॒द्रोह॒ यद्वा॑ शे॒प उ॒तानृ॑तम् ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय