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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 5.9

८ (२४३)
अ॒ᳪशुर॑ᳪशुष्टे देव सो॒माप्या॑यता॒मिन्द्रा॑यैकधन॒विदे॑ ।
आ तुभ्य॒मिन्द्रः॒ प्याय॑ता॒मा त्वमिन्द्रा॑य प्यायस्व ॥५॥

पूरा अध्याय