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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 4.23

(५) २२
ए॒षा ते॑ शुक्र त॒नूरे॒तद्वर्च॒स्तया॒ सम्भ॑व॒ भ्राजं॑ गच्छ । जूर॑सि धृ॒ता मन॑सा॒ जुष्टा॒ विष्ण॑वे ॥१॥

पूरा अध्याय