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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 4.2

इ॒मा आपः॒ शमु॑ मे सन्तु दे॒वीरोष॑धे॒ त्राय॑स्व स्वधि॑ते॒ मैन॑ᳪ हिᳪसीः ।
आपो॑ अ॒स्मान्मा॒तरः॑ शुन्धयन्तु घृ॒तेन॑ नो घृत॒प्वः॑ पुनन्तु ॥२॥

पूरा अध्याय