ग्रंथशुक्ल यजुर्वेद (काण्व)अध्याय 44.13शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 4.13२॥ उच्छ्र॑यस्व वनस्पत ऊ॒र्ध्वो मा॑ पा॒ह्यᳪ ह॑सः। आस्य य॒ज्ञस्यो॒दृचः॑ ॥४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय