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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 39.12

य॒माय॒ स्वाहान्त॑काय॒ स्वाहा॑ मृ॒त्यवे॒ स्वाहा॒ ।
ब्र॒ह्म॒ह॒त्यायै॒ स्वाहा॒ विश्वे॑भ्यो दे॒वेभ्यः॒ स्वाहा॒ द्यावा॑पृथि॒वीभ्या॒ᳪ स्वाहा॑ ॥३॥

पूरा अध्याय