Utshovऐप डाउनलोड करें

शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 38.26

मयि॒ त्यदि॑न्द्रि॒यं बृ॒हन्मयि॒ दक्षो॒ मयि॒ क्रतुः॑ ।
घ॒र्मस्त्रि॒शुग्वि रा॑जति वि॒राजा॒ ज्योति॑षा स॒ह ब्रह्म॑णा॒ तेज॑सा स॒ह ॥
पय॑सो॒ रेत॒ आभृ॑तं॒ तस्य॒ दोह॑मशीम॒ह्युत्त॑रामुत्तरा॒ᳪ समा॑म् ॥२॥

पूरा अध्याय