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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 38.22

अचि॑क्रद॒द्वृषा॒ हरि॑र्म॒हान्मि॒त्रो न द॑र्श॒तः । सᳪ सूर्ये॑ण दिद्युतदुद॒धिर्नि॒धिः ॥५॥

पूरा अध्याय