Utshovऐप डाउनलोड करें

शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 37.20

अहः॑ के॒तुना॑ जुषताᳪ सु॒ज्योति॒र्ज्योति॑षा॒ स्वाहा॑ ।
रात्रिः॑ के॒तुना॑ जुषताᳪ सु॒ज्योति॒र्ज्योति॑षा॒ स्वाहा॑ ॥७॥

पूरा अध्याय