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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 37.13

स्वाहा॑ म॒रुद्भिः॒ परि॑ श्रीयस्व । दि॒वः स॒ᳪस्पृश॑स्पाहि । मधु॒ मधु॒ मधु॑ ॥३॥

पूरा अध्याय