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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 35.54

स्यो॒ना पृ॑थिवि नो भवानृक्ष॒रा नि॒वेश॑नी ।
यच्छा॑ नः॒ शर्म॑ स॒प्रथाः॑ । अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒धम् ॥२०॥

पूरा अध्याय