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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 35.48

अग्न॒ आयू॑ᳪषि पवस॒ आ सु॒वोर्ज॒मिषं॑ च नः ।
आ॒रे बा॑धस्व दु॒च्छुना॑म् ॥१४॥

पूरा अध्याय