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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 35.44

अपा॒घमप॒ किल्वि॑ष॒मप॑ कृ॒त्यामपो॒ रपः॑ ।
अपा॑मार्ग॒ त्वम॒स्मदप॑ दुः॒ष्वप्न्य॑ᳪ सुव ॥१०॥

पूरा अध्याय