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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 35.32

सद॑स॒स्पति॒मद्भु॑तं प्रि॒यमिन्द्र॑स्य॒ काम्य॑म् । स॒निं मे॒धाम॑यासि॒ष॒ᳪ स्वाहा॑ ॥१०॥

पूरा अध्याय