ग्रंथशुक्ल यजुर्वेद (काण्व)अध्याय 3434.3शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 34.3विश्वा॑नि देव सवितर्दुरि॒तानि॒ परा॑ सुव । यद्भ॒द्रं तन्न॒ आ सु॑व ॥३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय