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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 33.3

अन्विद॑नुमते॒ त्वं मन्या॑सै॒ शं च॑ नस्कृधि ।
क्रत्वे॒ दक्षा॑य नो हिनु॒ प्र ण॒ आयू॑ᳪषि तारिषः ॥३॥

पूरा अध्याय