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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 32.77

उप॑ नः सू॒नवो॒ गिरः॑ शृ॒ण्वन्त्व॒मृत॑स्य॒ ये । सु॒मृ॒ळी॒का भ॑वन्तु नः ॥८॥

पूरा अध्याय