ग्रंथशुक्ल यजुर्वेद (काण्व)अध्याय 3232.61शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 32.61उ॒ग्रा वि॑घ॒निना॒ मृध॑ इन्द्रा॒ग्नी ह॑वामहे । ता नो॑ मृळात ई॒दृशे॑ ॥७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय