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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 32.56

इन्द्र॑वायू इ॒मे सु॒ता उप॒ प्रयो॑भि॒रा ग॑तम् । इन्द॑वो वामु॒शन्ति॒ हि ॥२॥

पूरा अध्याय