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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 3.75

येन॑ धा॒ता बृह॒स्पते॒रिन्द्र॑स्य॒ चायु॒षेऽव॑पत्।तेन॑ ते वपामि॒ ब्रह्म॑णा जी॒वात॑वे॒ जीव॑नाय ॥५॥

पूरा अध्याय