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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 3.36

सो॒मान॒ᳪ स्वर॑णं कृणु॒हि ब्र॑ह्मणस्पते । क॒क्षीव॑न्तं॒ य औ॑शि॒जः ॥२०॥

पूरा अध्याय