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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 3.12

१॥
स॒जूर्दे॒वेन॑ सवि॒त्रा स॒जूरु॒षसेन्द्र॑वत्या । जु॒षा॒णः सूर्यो॑ वेतु॒ स्वाहा॑ ॥४॥

पूरा अध्याय