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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 27.24

पृष॑दश्वा म॒रुतः॒ पृश्नि॑मातरः शुभं॒यावा॑नो वि॒दथे॑षु॒ जग्म॑यः ।
अ॒ग्नि॒जि॒ह्वा मन॑वः॒ सूर॑चक्षसो॒ विश्वे॑ नो दे॒वा अव॒साग॑मन्नि॒ह ॥७॥

पूरा अध्याय