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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 24.8

निवि॑ष्टाय॒ स्वाहोप॑विय॒ स्वाहा॒ संदि॑ताय॒ स्वाहा॒ वल्ग॑ते॒ स्वाहा॑ ।
आसी॑नाय॒ स्वाहा॒ शया॑नाय॒ स्वाहा॒ स्वप॑ते॒ स्वाहा॒ जाग्र॑ते॒ स्वाहा॑ ॥२॥

पूरा अध्याय