Utshovऐप डाउनलोड करें

शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 24.43

शू॒षाय॒ स्वाहा॑ सᳪस॒र्पाय॒ स्वाहा॑ च॒न्द्राय॒ स्वाहा॒ ज्योति॑षे॒ स्वाहा॑ ।
म॒लि॒म्लु॒चाय॒ स्वाहा॒ दिवा॑ प॒तय॑ते॒ स्वाहा॑ ॥२॥

पूरा अध्याय