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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 24.32

नि॒का॒मेनि॑कामे नः प॒र्जन्यो॑ वर्षतु॒ पल॑वत्यो न॒ ओष॑धयः पच्यन्ताम् ।
यो॒ग॒क्षे॒मो नः॑ कल्पताम् ॥३॥

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