शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 24.30
आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः॑ ।
शूर॑ इष॒व्यो॑ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यताम् ॥१॥
आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः॑ ।
शूर॑ इष॒व्यो॑ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यताम् ॥१॥