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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 24.23

(४) २२
अजी॑जनो॒ हि प॑वमान॒ सूर्यं॑ वि॒धारे॒ शक्म॑ना॒ पयः॑ । गोजी॑रया॒ रᳪह॑माणः॒ पुर॑न्ध्या ॥१॥

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