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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 24.21

तं त्वा॑ घृतस्न ईमहे॒ चित्र॑भानो स्व॒र्विद॑म् । देवाँ२ आ वी॒तये॑ वहे ॥९॥

पूरा अध्याय