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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 24.14

हिर॑ण्यपाणिमू॒तये॑ सवि॒तार॒मुप॑ ह्वये । स चेत्ता॑ दे॒वता॑ प॒दम् ॥२॥

पूरा अध्याय